Open Interest Explained: बड़े Players Market कैसे Control करते हैं?

Option trading सीखते समय ज़्यादातर लोग सिर्फ price, candle और premium पर ध्यान देते हैं। कोई chart देख रहा होता है, कोई indicator, कोई बस टिप्स पर trade कर रहा होता है। लेकिन जो लोग वास्तव में लगातार पैसा बना रहे होते हैं, वे एक extra चीज़ हमेशा देखते हैं, जिसका नाम है Open Interest…


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Open Interest

Option trading सीखते समय ज़्यादातर लोग सिर्फ price, candle और premium पर ध्यान देते हैं। कोई chart देख रहा होता है, कोई indicator, कोई बस टिप्स पर trade कर रहा होता है। लेकिन जो लोग वास्तव में लगातार पैसा बना रहे होते हैं, वे एक extra चीज़ हमेशा देखते हैं, जिसका नाम है Open Interest यानी OI।

Open Interest को आप ऐसे समझो जैसे battlefield पर खड़ी फौज। Price सिर्फ गोलीबारी दिखाता है, लेकिन OI बताता है कि मैदान में कितने सिपाही अभी भी खड़े हैं, कितने नए आए और कितने भाग चुके हैं। इसी से पता चलता है कि trend के पीछे असली दम कितना है।

बड़े institutions, FII, DII और professional traders option में पैसा लगाने से पहले OI को बहुत ध्यान से पढ़ते हैं। अगर आप भी option trading में serious हो और सिर्फ guesswork पर trade नहीं करना चाहते, तो OI समझना बहुत जरूरी है। इस आर्टिकल में हम Open Interest को बिल्कुल आसान भाषा में, step by step, example के साथ समझेंगे ताकि एक नया trader भी इसे comfortably use कर सके।

Open Interest क्या होता है (What is Open Interest in Options Trading)

Open Interest यानी किसी particular option या futures contract में अभी तक कितने contracts खुले हैं, जो अभी तक square off नहीं हुए हैं।

जब भी दो लोग आपस में नया option contract बनाते हैं तो OI बढ़ता है।
जब वे अपने contract को बंद कर देते हैं तो OI घटता है।

ध्यान रहे

OI “contracts” को count करता है, trades को नहीं

एक नया buyer और एक नया seller मिलकर एक नया contract बनाते हैं

उसी contract का buyer या seller जब exit करता है, तभी OI कम होता है

इसलिए OI आपको यह नहीं बताता कि कौन जीत रहा है, buyer या seller, लेकिन यह ज़रूर बताता है कि खेल में कितने लोग active हैं और position कितनी बड़ी है।

Open Interest और Volume में क्या फर्क है?

कई beginners को लगता है कि Volume और OI एक ही चीज़ हैं, जबकि दोनों बिल्कुल अलग concepts हैं।

Volume

दिन भर में कितने contracts buy और sell हुए

हर trade volume में count होता है

एक ही contract पूरे दिन कई बार हाथ बदल सकता है, हर बार volume बढ़ेगा

Open Interest

सिर्फ इतने contracts count करता है जो day end पर अभी भी खुले हैं

अगर सिर्फ मालिक बदला और contract बंद नहीं हुआ, तो OI नहीं बदलेगा

OI बढ़ता है या घटता है, तभी जब नया contract बने या पुराना खत्म हो

आप इसे ऐसे समझो

Volume = दिन भर की total हलचल

Open Interest = दिन के अंत में कितने लोग अभी भी game में खड़े हैं

 

OI कैसे बढ़ता और घटता है?

चलो अब चार simple cases से समझते हैं कि OI कब बढ़ेगा और कब घटेगा।

Case 1: दोनों नए हैं

एक नया buyer और एक नया seller मिलकर trade करते हैं

Volume बढ़ा

OI भी एक contract से बढ़ गया

Case 2: पुराना buyer अपनी position किसी नए buyer को बेच देता है

Volume बढ़ा क्योंकि trade हुआ

लेकिन OI वही रहा, क्योंकि contract पहले भी open था, अब भी open है, सिर्फ मालिक बदला है

Case 3: पुराना buyer और पुराना seller दोनों अपनी position close करते हैं

Volume बढ़ा

OI एक contract से घट गया, क्योंकि contract खत्म हो गया

Case 4: एक नया buyer किसी पुराने seller से deal करता है

Volume बढ़ा

OI बढ़ सकता है या stable रह सकता है, यह इस बात पर depend करता है कि seller पुराना contract बंद कर रहा है या नया बना रहा है

शुरुआत में इतना deep technical जाने की जरूरत नहीं, बस इतना याद रखो, OI बढ़ना मतलब market में नया पैसा आ रहा है, OI घटना मतलब पुरानी positions निकल रही हैं।

आसान उदाहरण से समझो Open Interest

मान लो एक छोटी सी सब्जी मंडी है जहाँ सिर्फ आलू के थैले बिकते हैं।

सुबह मंडी में zero थैले हैं, यानी OI शून्य है।

1. राम और श्याम ने आपस में आलू का एक थैला future में देने का contract किया।

OI अब 1 हो गया

 

2. दो और लोग आए, उन्होंने भी आपस में दो अलग contracts बनाए।

अब OI 3 हो गया

 

3. दो contracts वाले लोगों ने अपना सौदा खत्म कर दिया।

OI वापस 1 रह गया

पूरे दिन खरीद और बिक्री होती रही, volume शायद 100 थैले का हो गया, लेकिन दिन के अंत में सिर्फ 1 contract open है, तो OI 1 ही माना जाएगा। इसी तरह option market में हर strike price, हर expiry की अपनी अलग OI होती है।

Price और Open Interest को साथ में कैसे पढ़ें?

असली मज़ा यहाँ आता है। सिर्फ OI देखना काफी नहीं है, उसे price के साथ पढ़ना पड़ता है। इससे पता चलता है कि market में किस तरह की positions बन रही हैं।

1. Price ऊपर जा रहा है और OI भी बढ़ रहा है

इसे कहते हैं Long Build Up
मतलब लोग नई buying कर रहे हैं, trend के पीछे दम है, bulls control में हैं।

2. Price गिर रहा है और OI बढ़ रहा है

इसे कहते हैं Short Build Up
मतलब लोग बड़ी मात्रा में बेच रहे हैं, bears stronger हो रहे हैं।

3. Price ऊपर जा रहा है और OI घट रहा है

इसे कहते हैं Short Covering
मतलब जिन्होंने पहले बेच रखा था, अब घबराकर अपनी selling positions काट रहे हैं। यह अक्सर sharp up move में होता है।

4. Price गिर रहा है और OI घट रहा है

इसे कहते हैं Long Unwinding
मतलब buyers अपनी positions बंद कर रहे हैं, trend कमजोर पड़ रहा है।

अगर आप रोज़ chart के साथ OI change देखना शुरू कर दो, तो धीरे धीरे समझ आने लगेगा कि कहाँ असली buying हो रही है और कहाँ सिर्फ temporary move है।

Calls और Puts में OI से Support और Resistance कैसे समझें?

Index options में traders अक्सर option chain के OI को देख कर intraday और positional levels बनाते हैं।

Call OI से Resistance

जिस strike पर सबसे ज्यादा Call OI जमा है, वहाँ अक्सर strong resistance बनता है

मान लो Nifty 22500 पर चल रहा है और 23000 CE पर बहुत ज़्यादा OI दिख रहा है
तो traders मान सकते हैं कि 23000 के ऊपर निकलना मुश्किल होगा जब तक Call writers अपना position नहीं बदलते

Put OI से Support

जिस strike पर सबसे ज्यादा Put OI है, वह अक्सर strong support बन जाता है

अगर 22000 PE पर भारी OI है, तो market गिरने पर वहां से bounce आने की possibility बढ़ जाती है

ये हमेशा hundred percent सही नहीं होता, लेकिन market का broad mood समझने के लिए यह बहुत useful tool है।

Put Call Ratio (PCR) से Market Sentiment कैसे समझें?

Open Interest से निकला एक simple सा data होता है Put Call Ratio (PCR)
यह होता है
Total Put OI ÷ Total Call OI

अगर PCR बहुत कम है, मान लो 0.6, तो इसका मतलब market में Call ज्यादा लिखे गए हैं, bearish sentiment हो सकता है

अगर PCR बहुत ज्यादा है, मान लो 1.5 से ऊपर, तो Put ज्यादा लिखे जा रहे हैं, oversold या cautious bullish sentiment माना जा सकता है

Intraday में बहुत extreme PCR levels पर reversal भी possible होता है, लेकिन beginner को first step में इसे सिर्फ sentiment indicator की तरह देखना चाहिए, direct trading system मत बनाओ।

Option Chain में OI practically कैसे देखें?

अब theory काफी हो गई, चलो practically देखते हैं कि आप अपने mobile या computer पर OI data कहाँ से देख सकते हैं।

1. सबसे पहले NSE की official site, या अपने broker की app खोलो

2. Index या stock चुनो, जैसे Nifty, Bank Nifty, Reliance

3. Option Chain वाला section open करो

4. बीच में एक table दिखेगी जिसमें हर strike के आगे Call और Put के columns होंगे

5. इन columns में आपको Open Interest और Change in OI अलग से दिखाई देगा

6. High OI वाले strikes को अलग रंग या bold में दिखाया जाता है, वहीं से आपको support resistance के levels का अंदाजा लगेगा

 

शुरुआत में थोड़ा confusing लगेगा, लेकिन रोज़ दो तीन दिन देखोगे तो धीरे धीरे आंखें खुद ही trained हो जाएँगी।

Open Interest से जुड़े common गलतियाँ?

बहुत सारे retail traders OI को गलत तरीके से use कर लेते हैं, और फिर कहते हैं कि “OI से कुछ फायदा नहीं होता।” असल में problem data में नहीं, use करने के तरीके में होती है।

1. सिर्फ OI देखकर trade करना
Price action, trend, support resistance सब ignore करके सिर्फ option chain देखने से loss almost तय है।

2. Low liquidity वाले contracts में फँस जाना
कहीं OI कम है, volume कम है, वहाँ entry भी मुश्किल और exit भी। हमेशा liquid strikes चुनो।

3. Near expiry में गलत reading
Expiry के दिन या उसके पास OI बहुत तेजी से shift होता है, वहाँ गलत interpretation common है।

4. छोटे changes को ज्यादा importance देना
कभी कभी बहुत छोटा सा change किसी reason से आता है, उसे trend मान लेना गलत होगा।

5. Intraday OI को लंबी अवधि के indicator की तरह देखना
Intraday में noise ज्यादा होती है, वही data अगर daily closing पर देखो तो picture ज्यादा साफ मिलेगी।

 

OI को practically कैसे use करें?

1. Intraday trader के लिए

Market खुलने के पहले option chain देखो

सबसे ज्यादा Put OI कहाँ है, उसे intraday support मानो

सबसे ज्यादा Call OI कहाँ है, उसे intraday resistance मानो

अगर दिन में अचानक किसी नए strike पर बहुत ज़्यादा OI build हो जाए, तो समझो नए बड़े players आए हैं

2. Positional trader के लिए

Weekly या monthly basis पर OI change को price के साथ देखो

अगर लगातार कई दिन price ऊपर जा रहा है और OI भी बढ़ रहा है, तो positional long build up का signal हो सकता है

अगर price तो ऊपर जा रहा है पर OI घट रहा है, तो सावधान रहो, शायद सिर्फ short covering चल रही है

3. Event days पर

Result, RBI policy, budget जैसे events के पहले OI बहुत तेजी से इधर उधर shift होता है।
अगर किसी side पर अचानक heavy OI build हो, तो event के बाद उसी side की move often ज्यादा powerful होती है।

FAQs: Open Interest से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल और उनके जवाब

 

Q1. क्या OI बताता है कि buyer जीत रहा है या seller
नहीं, OI सिर्फ contracts की संख्या बताता है, कौन जीत रहा है यह price बताएगा।

Q2. क्या high OI वाला strike हमेशा support या resistance बनता है
अधिकतर बार बनता है, पर हमेशा नहीं, इसलिए price action के साथ use करो।

Q3. क्या सिर्फ OI देखकर trade करना सही है
नहीं, OI सिर्फ एक tool है, इसे chart, trend और risk management के साथ मिलाकर use करो।

Q4. क्या OI data हमेशा सही होता है
NSE या exchange से आया data भरोसेमंद होता है, लेकिन real time app में कभी कभी delay हो सकता है।

Q5. OI किस time frame के लिए ज्यादा useful है
Day end data positional traders के लिए, intraday change scalpers और day traders के लिए।

Q6. क्या OI सिर्फ option में होता है या futures में भी
Open Interest futures contracts के लिए भी होता है, concept वही है।

Q7. क्या low OI वाली strike में trade करना गलत है
बहुत low OI वाली strike में liquidity risk बढ़ जाता है, entry exit मुश्किल हो सकती है।

Q8. क्या OI से operator activity पकड़ सकते हैं
हर बार नहीं, पर अचानक किसी strike पर abnormal OI build up हो तो जरूर ध्यान देना चाहिए।

Q9. क्या beginners को OI use करना चाहिए
हाँ, लेकिन पहले basic concept clear करके, छोटे capital और paper trading के साथ practise करो।

Q10. क्या OI data free में मिल सकता है
हाँ, NSE की website और ज्यादातर brokers की apps पर OI data free में available होता है।

निष्कर्ष: Open Interest आपका market X-ray है

अगर price candle की तरह दिखता है तो OI एक्स रे की तरह काम करता है। ऊपर से चीजें कुछ और दिख सकती हैं, लेकिन अंदर क्या चल रहा है, कितनी position build हो रही है, कहाँ बड़ा पैसा लगा है, यह सब OI से समझ में आता है।

फिर भी याद रखो, OI कोई जादू नहीं है। यह सिर्फ एक powerful tool है, जो सही तरीके से use करने पर आपके decision को मजबूत बनाता है। Option trading में सक्सेस सिर्फ एक data point से नहीं आती, बल्कि समझ, discipline, risk management और patience के combination से आती है।

अगर आप अभी सिर्फ price और chart देख कर trade कर रहे हैं, तो अब से OI को भी धीरे-धीरे अपनी analysis में शामिल करना शुरू करो। कुछ हफ्तों बाद खुद महसूस होगा कि आपकी reading पहले से ज्यादा साफ होने लगी है।

 

Disclaimer

यह आर्टिकल केवल शिक्षा के उद्देश्य से लिखा गया है। यहाँ दी गई किसी भी बात को buy या sell की सलाह न मानें। Option trading और derivatives में बड़ा risk होता है, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने financial advisor से सलाह ज़रूर लें और खुद भी पूरी रिसर्च करें।

 

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